
भारतीय शिक्षण मंडल की पंजाब इकाई का गठन, इन्हें सौंपी जिम्मेदारियां
भारतीय शिक्षण मंडल, पंजाब इकाई के सत्र का पहला आयोजन 8 अक्तूबर 2023 को किया गया। इस सत्र में भारतीय शिक्षण मंडल की पंजाब इकाई का गठन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी थे। इस अवसर पर उन्होंने संगठन के लिए कार्यकर्ता की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में गुरुकुलों में सिर्फ पढ़ाया ही नहीं जाता था, बल्कि जीवन जीने की पद्धति भी सिखाई जाती थी, उसी प्रकार संगठन के विकास के लिए करणीय और अकरणीय कार्य का बोध कार्यकर्ता को होना चाहिए। क्योंकि अनुशासन से सिद्धि तक कार्य करना ही कार्यकर्ता के लक्षण होते हैं। उन्होंने सच्चे कार्यकर्ता को देश उत्थान के लिए सक्रिय रहने और अपने दायित्व को समझते हुए निरंतन कार्य करते रहने का आहवान भी किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यकर्ताओं से सामान्य जीवन के बजाए संगठन के लिए उपयोगी जीवन जीने के लिए कार्यकुशलता बढ़ाने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि प्रतिभावान कार्यकर्त्ता में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के साथ-साथ पठन व पाठन के प्रति अग्रसर रहना चाहिए। प्रोफेसर तिवारी ने कार्यकर्त्ता के सीखने के चार चरणों पर बल दिया जिसमें सुनने, सुनते हुए चीज को मनन करने, लोगों से चर्चा करने एवं उसके मूल्यांकन करने पर बल दिया, ताकि वो सधा हुआ कार्यकर्ता बन सकें। तभी वह कार्यकर्ता संगठनात्मकता के तौर पर देश को जानकर, देश का नेता बन सकता है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आई.आई.एम.सी. जम्मू के डा. दिलीप ने की।
इस मौके पर भारतीय शिक्षण मंडल पंजाब की नई कार्यकारणी बनाई गई, जिसके अध्यक्ष- प्रो. राजीव आहूजा, डायरेक्टर आई.आई.टी. रोपड़, मंत्री- प्रो. मंजीत बंसल, एम.आर.एस. पीटीयू, शैक्षणीक स्तर पर उच्च पदों पर कार्यरत तीन कार्यकताओं को सहमंत्री एवं विभिन्न आयामों के प्रमुख एवं सहप्रमुख नियुक्त किए गए। इस अवसर पर विशेषतौर पर एन.आई.टी.टी.टी.आर. के डायरेक्टर प्रोफेसर भोला राम गुज्जर, कुलपति पंजाब यूनिवर्सिटी प्रोफेसर रेणु विज, चण्डीगढ़ महानगर इकाई के संयोजक प्रो. संजय कौशिक, पंजाब व चंडीगढ़ संगठन मंत्री अनिल दीक्षित एवं हिमाचल के संगठन मंत्री कौशल प्रताप उपस्थित हुए।







