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  • सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा रहेगा बरकरार..

     सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा रहेगा बरकरार..

     

     

    नई दिल्ली : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसख्यंक दर्जे (AMU minority status will remain) पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट का कहना है कि एएमयू का अल्पसंख्यक का दर्जा बरकरार रहेगा। कोर्ट ने 4-3 (4-3 verdict) के बहुमत से यह फैसला सुना दिया है। इस मामले पर सीजेआई समेत चार जजों ने एकमत फैसला दिया है जबकि तीन जजों ने डिसेंट नोट दिया है। मामले पर सीजेआई और जस्टिस पारदीवाला एकमत हैं। वहीं, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का फैसला अलग है।

     अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है, जो धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने तथा उनके प्रशासन का अधिकार भी देता है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुना दिया। पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे बी पारदीवाला, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा भी शामिल हैं। जजों की पीठ ने 8 दिन तक दलीलें सुनने के बाद एक फरवरी को इस सवाल पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    एक फरवरी को एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे के मसले पर देश की शीर्ष अदालत ने कहा था कि एएमयू एक्ट में 1981 का संशोधन, जिसने प्रभावी रूप से इसे अल्पसंख्यक दर्जा दिया, ने केवल आधे-अधूरे मन से काम किया। प्रतिष्ठित संस्थान को 1951 से पहले की स्थिति में बहाल नहीं किया। एएमयू एक्ट, 1920 अलीगढ़ में एक शिक्षण और आवासीय मुस्लिम विश्वविद्यालय की बात करता है। जबकि 1951 के संशोधन के जरिए विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों के लिए अनिवार्य धार्मिक शिक्षा को खत्म करने का प्रावधान किया गया।

    इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना साल 1875 में सर सैयद अहमद खान की अगुवाई में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज के रूप में की गई थी। कई साल के बाद 1920 में, इसे एक विश्वविद्यालय में तब्दील कर दिया गया।

  • LMV लाइसेंस धारक रखने वाला व्यक्ति अब 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकेंगा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

    LMV लाइसेंस धारक रखने वाला व्यक्ति अब 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकेंगा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

     

     

    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) का ड्राइविंग लाइसेंस रखने वाला व्यक्ति अब 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकता है। यह फैसला बीमा कंपनियों और ड्राइवरों दोनों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ इस पर फैसला सुनाया है।

    बीमा कंपनियां लंबे समय से इस बात पर सवाल उठाती रही थीं कि क्या एलएमवी लाइसेंस धारक ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने के लिए योग्य हैं। उनका तर्क था कि दोनों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की आवश्यकता होती है। इस मुद्दे पर कई बार विवाद हुए और अदालतों में मुकदमे भी हुए।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है कि एलएमवी लाइसेंस धारक 7500 किलोग्राम तक के हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चला सकते हैं। इस फैसले से बीमा कंपनियों को अब ऐसे मामलों में क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकेंगी। सरकार ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। केंद्र सरकार शीतकालीन सत्र में मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन करके इस फैसले को कानूनी रूप देगी।

    इस फैसले के बाद अब ड्राइवरों को अलग से ट्रांसपोर्ट वाहन का लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। बीमा कंपनियों को अब इस मुद्दे पर विवाद करने की जरूरत नहीं होगी। इस फैसले से यातायात नियमों में एकरूपता आएगी। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो हल्के ट्रांसपोर्ट वाहन चलाते हैं।