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  • विदेश मंत्री ने किस विषय को लेकर कही यह बात,”केवल अपने देश में नहीं बल्कि दूसरे देशों के लोकतंत्र के प्रति भी जिम्मेदारी को समझना चाहिए”

    विदेश मंत्री ने किस विषय को लेकर कही यह बात,”केवल अपने देश में नहीं बल्कि दूसरे देशों के लोकतंत्र के प्रति भी जिम्मेदारी को समझना चाहिए”

    आस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ 13वीं ‘विदेश मंत्रियों की रूपरेखा वार्ता’ (एफ.एम.एफ.डी.) के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जयशंकर ने कहा कि हालिया में कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियां बढ़ी हैं। खालिस्तान संबंधी मुद्दे पर किए गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘कनाडा सरकार के साथ हमने लगातार इस मुद्दे पर बात की है, मैंने (खालिस्तान के) मुद्दे पर अपने समकक्ष के साथ भी बातचीत की है। हमने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है कि एक लोकतांत्रिक समाज में हिंसा व कट्टरता की वकालत करने वालों द्वारा स्वतंत्रता का दुरुपयोग ना किया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह समझना जरूरी है कि लोकतंत्र को कैसे काम करना चाहिए…. केवल अपने देश में नहीं बल्कि दूसरे देशों के लोकतंत्र के प्रति भी जिम्मेदारी को समझना चाहिए।’ विदेश मंत्री जयशंकर ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच कहा कि एक उदार लोकतंत्र के तौर पर भारत और आस्ट्रेलिया कानून आधारित एक अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय समुद्र क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता, सभी के लिए विकास व सुरक्षा को बढ़ावा देने में विश्वास रखते हैं। एक पत्रकार की ओर से रूसी हथियारों पर निर्भरता खत्म करने के सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे पास सोवियत और रूस निर्मित हथियार काफी अधिक हैं। इसके कई कारण हैं। आपको भी हथियार प्रणालियों के नफा-नुकसान के बारे में अच्छी तरह पता है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद सात दशक के दौरान आधे से अधिक समय वहां सैन्य शासन रहा है। गौरतलब है कि हमलावर मिसाइलों को मार गिराने वाली प्रणाली एस-400 की पहली इकाई की आपूर्ति रूस ने पिछले साल दिसंबर में शुरू की थी। मिसाइल प्रणाली उत्तरी क्षेत्र में चीन के साथ सीमा के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पाकिस्तान के साथ सीमा की सुरक्षा करने के लिए कोण से तैनात किया गया है।

    इससे पहले अपनी अमरीका यात्रा के दौरान भी और संयुक्त राष्ट्र की महासभा में स्पष्ट शब्दों में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि आज जब विश्व का ध्रुवीकरण हो चुका है तो इसमें भारत ही एक ऐसी शक्ति है जो इन ध्रुवों के बीच पुल का काम कर सकती है। उन्होंने साफ कहा कि आज का भारत वह पुराना भारत नहीं है जिसकी आसानी से उपेक्षा की जा सके। हमारी आवाज, हमारा दृष्टिकोण पूरी तरह से महत्व पा रहा है और इसी संदेश को लेकर विदेश मंत्री अपने जैसे लगभग सौ अन्य देशों के विदेशमंत्रियों से भी मिले। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर जयशंकर ने कहा कि भारत पूरी तरह से शांति के पक्ष में है।

    उसका विश्वास है कि ऐसे संकट में से संवाद और कूटनीति से ही निपटा जा सकता है। लेकिन उन्होंने एक और खतरे की चेतावनी दी, वह यह कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद जैसी शक्तिशाली परिषद को और समावेशी होना चाहिए और उसके पांच स्थाई देशों के पास ही वीटो पावर न रहे। उन्होंने कहा कि जब हकीकत को भांपते हुए इस मंच से कुछ आतंकवादी घोषित किए जाते हैं तो चीन अपनी वीटो पावर के साथ उन्हें आतंकवादियों की सूची में रहने नहीं देता। इस प्रकार दुनिया की आतंकवाद से लड़ाई बहुत भोथरी हो जाती है। उनका यह भी कहना था कि सुरक्षा परिषद को समावेशी होना चाहिए। उसकी स्थाई-अस्थाई देशों की संख्या में इजाफा हो। या वीटो की ताकत इन चंद शक्तियों से वापस ले ली जाए या नये आते देशों को भी इस वीटो पावर का हक मिले। इतने वर्षों से सुरक्षा परिषद केवल पांच स्थाई सदस्यों के साथ ही चल रहा है। यह न उचित है, न वास्तविकता के करीब। इसीलिए भारत जैसी महाशक्ति जो अब दुनिया की पांचवीं महाशक्ति बन गई है और जल्दी ही अपनी उन्नति और विकास के साथ दुनिया की तीसरी महाशक्ति बनने जा रही है, उसे सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता से बाहर रखना गलत है।

    सुरक्षा परिषद को बहुत छोटे देशों का हमेशा समर्थन मिला है लेकिन उन्हें स्थाई सदस्यता से बाहर रखने के कारण वे किसी प्रकार की निर्माणात्मक भूमिका नहीं निभा सकते। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के बढ़ते राजनीतिक कद और बढ़ती भूमिका को लेकर जिस ढंग से अपना पक्ष रखा है उसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। बड़ी देर के बाद देश को एक ऐसा विदेश मंत्री मिला है जो भारत के हित को प्राथमिकता देते हुए बड़ी नम्रता लेकिन दृढ़ता के साथ भारत की बात को रख रहा है।

    अमरीका, चीन, रूस और कनाडा जैसे कई अन्य देश भारत के बढ़ते कदमों और रूस की निकटता को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत को कटघरे में खड़ा करने के एक नहीं कई बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उपरोक्त सभी देशों को पहले अपने भीतर झांकने और उन्हें आईना दिखाते हुए सत्य को स्वीकार करने की बात जिस ढंग से की, उससे भारत की छवि और साख दोनों मजबूत ही हुए हैं। भारत की राह में बाधा खड़ी करने वाले देशों के दोहरे मापदंड भी जगजाहिर हुए हैं।

    सौजन्य:- उत्तम हिन्दू