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  • तेजाब की बिक्री पर बैन के बावजूद नहीं थम रहा एसिड अटैक के मामले, दिल्ली में तीन साल में 32 केस

    तेजाब की बिक्री पर बैन के बावजूद नहीं थम रहा एसिड अटैक के मामले, दिल्ली में तीन साल में 32 केस

     

     

     

    केंद्र सरकार ने बताया कि तीन साल में दिल्ली में तेजाब हमले के 32 मामले सामने आए हैं. सरकार ने बताया कि इस तरह के हमलों में महामारी के दौरान गिरावट देखी गई थी, लेकिन महामारी के बाद इसमें फिर से इजाफा हुआ है.

    बिक्री पर बैन के बावजूद नहीं थम रहा एसिड अटैक, दिल्ली में तीन साल में 32 केस

    एसिड अटैक सर्वाइवर (सांकेतिक)

    पश्चिमी दिल्ली के द्वारका में बुधवार सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकली 17 वर्षीय लड़की पर बाइक सवार दो नकाबपोश लोगों ने तेजाब फेंक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई. लड़की का सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है. दिल्ली में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है. केंद्र सरकार ने बताया कि तीन साल में दिल्ली में तेजाब हमले के 32 मामले सामने आए हैं. सरकार ने बताया कि इस तरह के हमलों में महामारी के दौरान गिरावट देखी गई थी, लेकिन महामारी के बाद इसमें फिर से इजाफा हुआ है.

    राज्यसभा में दिए गए डेटा से पता चलता है कि साल 2018 से 2021 के बीच दिल्ली में तेजाब हमले के 32 मामले दर्ज किए गए. यह आंकड़े नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के हवाले से दिए गए हैं. 2018 में एसिड अटैक के 11 मामले सामने आए थे, जबकि 2019 में ऐसे 10 मामले सामने आए, लेकिन 2020 में कोरोना महामारी के दौरान ऐसे मामले गिरकर दो पर आ गए थे. हालांकि दिए गए आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में एसिड अटैक के मामले बढ़कर 9 हो गए.

    सुप्रीम कोर्ट ने बैन का दिया था आदेश

    तेजाब हमले को लेकर लोगों में आक्रोश है और लोग प्रतिबंध के बावजूद बाजार में तेजाब की मौजूदगी को लेकर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में अपने एक आदेश में राज्य सरकारों को एसिड की रिटेल बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी कहा था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि एसिड की खुले बाजार में बिक्री न हो. दिल्ली में भी बिना लाइसेंस एसिड की बिक्री नहीं की जा सकती. इतना ही नहीं इसके खरीदार को भी अपनी पहचान देनी होती है.

    बिना लाइसेंस एसिड की बिक्री पर रोक

    इसी की जांच के लिए 2016 में दिल्ली महिला आयोग ने अपनी एक टीम ग्राउंड में भेजी और यह पता लगाने की कोशिश की, कि एसिड खरीदने के लिए बनाए गए यह नियम प्रभावी भी हैं या नहीं. महिला आयोग ने पाया था कि 23 ऐसी दुकानें थीं, जहां बिना आईडी कार्ड और कोई पहचान लिए बिना ही एसिड की बिक्री की जा रही थी. बाद में महिला आयोग ने दिल्ली सरकार से इसपर एक्शन लेने का अनुरोध किया था. इसकी जांच की जिम्मेदारी एसडीएम की होती है और वो नियम तोड़ने वालों पर 50 हजार रुपए का फाइन भी लगा सकते हैं.