रेलवे के बाद अब इस राष्ट्रीय मार्ग पर बने पुल पर मंडरा रहा खतरा, खौफ में लोग
पठानकोटः पंजाब-हिमाचल सीमा पर बहते चक्की दरिया में भारी बाढ़ आने के कारण पिछले दिनों अंग्रेजों के समय का बना रेलवे पुल ध्वस्त हो गया था, जिसके बाद अब पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना पुल भी खतरे की जद में है। खड्ड में पानी का बहाव एक तरफ मुड़ जाने से सड़क मार्ग पर बने पुल के पिलरों के पास भी 8-10 फुट गहरे गड्ढे बन गए हैं। लोगों की सुरक्षा को देखते पंजाब और हिमाचल के अधिकारियों ने आपसी सहमति के बाद इस पुल को अस्थायी तौर पर सील कर दिया है। सड़क से आवाजाही बंद होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा हिमाचल जाने वाले लोगों को 25 किलोमीटर का सफर तय कर अपनी मंजिल की ओर जाना पड़ रहा है।
जानकारी अनुसार, यह पुल पठानकोट-मंडी नेशनल हाइवे पर है। पुल के उस पार नागनी माता का मंदिर है, जहां आजकल मेला चल रहा है। देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में नतमस्तक होने जाते हैं। वहीं, यह रास्ता नूरपुर, जसूर से सीधा जुड़ा होने के कारण लोगों की लाइफलाइन है। पुल पर से वाहनों की आवाजाही बंद होने से लोग परेशान हैं। लेकिन, वहां पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग है। यह 15 किमी अतिरिक्त लंबा है। प्रशासन ने वाहनों को इसी रूट पर डायवर्ट किया है।
प्रशासन की नाक तले हो रहे अवैध खनन से पिछले लंबे समय से इन दोनों पुलों को नुकसान हो रहा था। इसके बावजूद शासन और प्रशासन इस पर नकेल कसने में पूरी तरह से विफल रहा। इसी का नतीजा है कि शनिवार को रेलवे पुल ताश के पत्तों की तरह पल भर में बिखर गया। चक्की दरिया में उफान के चलते वर्ल्ड पीस टेंपल के नाम से मशहूर डेरा स्वामी जगतगिरी आश्रम का मुख्य रास्ता पानी में समा गया।







