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  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोका दुनिया में न्युक्लियर वॉर! जयशंकर ने किया ये बड़ा खुलासा, अमेरिका ने मांगी थी मदद

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोका दुनिया में न्युक्लियर वॉर! जयशंकर ने किया ये बड़ा खुलासा, अमेरिका ने मांगी थी मदद

     

    विदेश मंत्री ने रूस यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए बताया कि खार्किव के उत्तर में सुमी में जंग के हालात और भी कठिन थे. हमने छात्रों को निकालने के लिए एक बस भेजी और जैसे ही वे बस में चढ़ने लगे, गोलीबारी फिर से शुरू हो गई. जाहिर है, छात्र डर गए और अपने हॉस्टल में वापस चले गए. वे डरे हुए थे और उनका आत्मविश्वास कम था.

    PM मोदी ने रोका दुनिया में न्युक्लियर वॉर! जयशंकर ने किया खुलासा, अमेरिका ने मांगी थी मदद

    विदेश मंत्री एस जयशंकर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कई खुलासे किए. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने रूस को यूक्रेन में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से रोकने के लिए भारत से मदद मांगी. साथ ही उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि अमेरिका ने रूस को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से रोकने के लिए भारत और चीन को फोन किया था.

    इंटरव्यू के दौरान, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुलासा किया कि अमेरिका ने रूस को संभावित परमाणु हमले से रोकने के लिए भारत जैसे गैर-सहयोगियों की मदद मांगी थी.

    यूक्रेन पर परमाणु हमला करने की तैयारी

    विदेश मंत्री ने बताया कि साल 2022 में, रूस ने संभावित रूप से यूक्रेन पर परमाणु हथियार से हमला करने की तैयारी शुरू कर दी थी, जो अमेरिका द्वारा हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने के बाद युद्ध में पहला परमाणु हमला होता. उन्होंने बताया कि बाइडेन प्रशासन चिंतित था कि रूस सामरिक या युद्धक्षेत्र परमाणु हथियार का उपयोग कर सकता है. अपनी किताब, द रिटर्न ऑफ ग्रेट पॉवर्स में, सीएनएन के जिम स्कुट्टो लिखते हैं कि अमेरिका ने रूस को इस तरह के हमले से हतोत्साहित करने के लिए गैर-सहयोगियों, विशेष रूप से चीन और भारत की मदद ली थी.

    संकट को टालने में की मदद

    अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आउटरीच और सार्वजनिक बयानों ने संकट को टालने में मदद की. दुनिया के कई देश इससे चिंतित थे. जयशंकर ने खुलासा किया कि कुछ देशों ने हमसे संपर्क किया और हमारी मदद मांगी क्योंकि ज्यादातर लोग नरेंद्र मोदी की बातों का सम्मान करते हैं. यहां तक कि एक अमेरिकी प्रवक्ता ने भी पुष्टि की है कि संघर्ष में परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग को रोकने के लिए कई देश एक साथ आए हैं.