DRDO ने ग्लाइड बम का  किया सफल परीक्षण,बढ़ाई सेना की ताकत..

 DRDO ने ग्लाइड बम का  किया सफल परीक्षण,बढ़ाई सेना की ताकत..

 

गौरव बम भारतीय सेना की ताकत को और बढ़ाएगा. यह एक हजार किलोग्राम का ग्लाइड बम है जो दुश्मन को तबाह कर देगा. उड़ीसा तट पर डीआरडीओ ने मंगलवार को इसका सफल परीक्षण किया.

 

दुश्मनों को तबाह करेगा एक हजार किलो का गौरव बम, DRDO ने किया सफल परीक्षण

डीआरडीओ ने ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया है.

DRDO ने ओडिशा तट से दूर भारतीय वायु सेना के Su-30 MK-I प्लेटफॉर्म से लंबी दूरी के ग्लाइड बम ‘गौरव’ का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया है. गौरव एक हवा से लॉन्च किया जाने वाला 1,000 किलोग्राम क्लास का ग्लाइड बम है जो लंबी दूरी तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम है. उड़ान-परीक्षण के दौरान, ग्लाइड बम ने लॉन्ग व्हीलर द्वीप पर स्थापित लक्ष्य को सटीक सटीकता के साथ मारा.

गौरव ग्लाइड बम को भारतीय वायुसेना के लिए विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है. जो नेविगेशन सिस्टम से लैस है. फाइटर जेट से लांच करने के बाद भी ये अपने नेविगेशन सिस्टम से टारगेट तक पहुंच सकता है और और ध्वस्त कर सकता है.

1000 किलोग्राम का है बम

ग्लाइड बम गौरव 1000 किलोग्राम का है, जो फाइटर जेट से लांच किए जाने के बाद 150 और उससे अधिक की दूरी तय कर दुश्मन को नेस्तनाबूत कर सकता है. इस बम में विंग भी हैं और नेविगेशन सिस्टम भी लगा है, जिससे यह किसी भी टारगेट तक पहुंच कर हमला कर सकता है. यह जीपीएस की मदद से संभव होता है, जो प्लेन से लांच होने के बाद नेविगेशन में सेट टारगेट को ध्वस्त कर सकता है.

Gaurav Bomb

डीआरडीओ ने इस बम को डिजाइन किया है.

 

DRDO ने डिजाइन किए है बम

डीआरडीओ ने भारतीय सेना के लिए दो बम डिजाइन किए हैं, इनमें पहले ग्लाइड बम गौरव है जो लंबी दूरी तक किसी भी लक्ष्य को भेद सकता है, इसमें विंग भी हैं, जबकि दूसरा गौतम है जो शॉर्ट रेंज टारगेट भेदता है. इन बमों का निर्माण अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस कर रहा है.

सफल रहा है परीक्षण

ग्लाइड बम गौरव ने लान्ग व्हीलर द्वीप पर तैनात लक्ष्य को सटीकता के साथ भेदा. परीक्षण का सारा डाटा टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रेकिंग सिस्टम में कैप्चर हुआ है. इस पूरे टेस्ट की निगरानी डीआरडीओ वैज्ञानिकों ने की. यह परीक्षण सुखोई फाइटर प्लेन से किया गया. इससे पहले पिछली साल भी ग्लाइड बम का परीक्षण किया गया था जो सफल रहा था.

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