क्या NRI को मिलेगी मतदान की इजाजत, केंद्र के आश्वासन पर SC ने बंद की सभी याचिकाएं

क्या NRI को मिलेगी मतदान की इजाजत, केंद्र के आश्वासन पर SC ने बंद की सभी याचिकाएं

 

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया उदय उमेश ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सुनवाई की शुरुआत में यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों पर अब और विचार नहीं किया जा सकता.

 

NRI को मिलेगी मतदान की इजाजत? केंद्र के आश्वासन पर SC ने बंद की सभी याचिकाएं

प्रवासी भारतीयों को डाक के जरिये मतदान करने का अधिकार देने के संबंध में दायर की गई थीं याविका.

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी भारतीयों और प्रवासी कामगारों को डाक या परोक्ष मतदान की अनुमति देने के लिए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश देने का आग्रह करने वाली लगभग एक दशक पुरानी याचिकाओं को अटॉर्नी जनरल के आश्वासन के बाद मंगलवार को बंद कर दिया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया उदय उमेश ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सुनवाई की शुरुआत में यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों पर अब और विचार नहीं किया जा सकता, जिनके कारण चुनाव आयोग ने एक समिति का गठन किया और बाद में संसद के एक सदन में इस आशय का विधेयक पेश किया गया.

पीठ ने याचिकाएं बंद करने से पहले कहा, ‘क्षमा करें. हम इसे अभी बंद करेंगे. ये वे मामले हैं जो पिछले नौ-दस वर्षों से लंबित हैं.’ इसने कहा कि अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने आश्वासन दिया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाया जाएगा कि बाहर रहने वाले व्यक्ति और प्रवासी कामगार चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा हों और चुनाव की गोपनीयता को बनाए रखते हुए मतदान की सुविधा का विस्तार किया जाएगा.

लोकसभा में पारित हुआ था बिल

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि चुनाव आयोग की ओर से गठित समिति की सुझाव को केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था और इसके बाद इसके संबंध में विधेयक को 2018 में लोकसभा में पेश किया था ताकि रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट, 1951 के सेक्शन 60 को संशोधित किया जा सके. इस विधेयक का मकसद प्रवासी भारतीयों के बदले उनकी ओर से नियुक्त किसी अन्य शख्स को मतदान करने की अनुमति देना था. विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था. हालांकि राज्यसभा में इसे पेश नहीं किया गया था. ऐसे में यह अपने आप ही खत्म हो गया था.

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