कनाडा में हिंदू-सिखों में मतभेद के पीछे कौन? पाकिस्तानी एजेंसी या जस्टिन ट्रूडो?
कनाडा के टोरंटो शहर में एक मिनी इंडिया है और उसका नाम है ब्रैम्पटन यहां की सवा छह लाख की आबादी में आधी आबादी इंडियन्स की है. पिछले दिनों ब्रैम्पटन के पास एटोबिकोको में हाईवे नंबर 427 के किनारे बने स्वामीनारायण मंदिर में कुछ लोगों ने तोड़-फोड़ कर दी और दीवारों पर भारत के ख़िलाफ़ नारे लिख दिए.
कनाडा के टोरंटो (Toronto) शहर में एक मिनी इंडिया है और उसका नाम है ब्रैम्पटन (Brampton), यहां की सवा छह लाख की आबादी में आधी आबादी इंडियन्स की है. इसमें भी सर्वाधिक आबादी पंजाबी सिखों, पंजाबी हिंदुओं और पाकिस्तनियों की है. मालूम हो कि कनाडा में पाकिस्तानी भी खुद को इंडियन ही बताते हैं क्योंकि एक तो बोली-बानी समान है, और दूसरे भारतीयों की ख़रीद क्षमता और साख अधिक है. इसलिए इंडिया के समूह में वे अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं. अब चार बर्तन हैं तो खड़केंगे ही. और अक्सर यहां यही होता रहता है.
पंजाब से आए ताज़ा-ताज़ा लोग अधिक गुस्सैल होते हैं. एक तो पंजाबी खून और दूसरा कनाडा की सरदी तथा यहां का अकेलापन और विविधता का न होना! मगर इस खड़काव में मुझे कभी कोई नफ़रत या घृणा नहीं दिखी. किंतु भारत में बैठे शुभचिंतक कुछ अधिक चिंतित हो जाते हैं. फ़ोन आने लगते हैं, कि आप ठीक तो हो. लेकिन एक बात समझ लीजिए, कि इस नफ़रत का लाभ कुछ वे देश उठाते हैं, वे जो सदैव इस ताक में ही रहते हैं कि भारत के लोग परस्पर कभी धर्म के नाम पर तो कभी बोली के नाम पर, कभी जाति के नाम पर लड़ते रहें.
ट्रूडो की चुप्पी अखर रही है
पिछले दिनों ब्रैम्पटन के पास एटोबिकोको (Etobicoke) में हाईवे नंबर 427 के किनारे बने स्वामीनारायण मंदिर में कुछ लोगों ने तोड़-फोड़ कर दी और दीवारों पर भारत के ख़िलाफ़ नारे लिख दिए. इसे ख़ालिस्तान समर्थकों का काम बताया गया. इसे लेकर कुछ लोगों ने हंगामा कर दिया और सोशल मीडिया पर इसे वायरल कर दिया. नतीजा यह हुआ कि ब्रैम्पटन इलाक़े के हिंदू समुदाय में खलबली मच गई. उनमें भय फैलने लगा और पड़ोसी पड़ोसी को शक की निगाह से देखने लगा.
लिबरल पार्टी की ब्रैम्पटन (दक्षिण) से सांसद सोनिया सिद्धू ने तत्काल इसकी निंदा की है. लिबरल पार्टी से ही हाउस ऑफ़ कॉमन्स के एक और सदस्य चंद्र कांत आर्य उर्फ़ चंद्र आर्य ने स्वामी नारायण मंदिर में तोड़-फोड़ को आपत्तिजनक बताया है. आर्य ने तो अपने ट्वीट में यह भी कहा, कि कुछ दिनों से कई मंदिरों में हिंसा की घटनाएं हुई हैं. इससे चिंता बढ़नी स्वाभाविक है. किंतु ख़ालिस्तान आंदोलन को हवा देने वाले राजनीतिक चुप हैं. स्वयं कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का अभी तक कोई बयान नहीं आया है. यह चुप्पी कनाडा में बसे भारतीयों को अखर रही है.
सौजन्य:- tv9








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