पंजाब में कोयले की कमी के कारण बिजली संकट: थर्मल प्लांट्स में कोयले की हुई भारी कमी, लोग कर रहे करीब 2 घंटे के पावर कट का सामना

पंजाब में कोयले की कमी के कारण बिजली संकट: थर्मल प्लांट्स में कोयले की हुई भारी कमी, लोग कर रहे करीब 2 घंटे के पावर कट का सामना

बिजली की मांग में हुई 40% की वृद्धि (फोटो आभार Twitter)

बिजली की मांग में हुई 40% की वृद्धि

 

पंजाब में बिजली संकट (Power Crisis in Punjab) गहराता जा रहा है. कोयले की भारी कमी की वजह से थर्मल प्लांट्स में बिजली उत्पादन ठप होने की आशंका लगातार बनी हुई है. ऐसे में लोग बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं, मगर पीएसपीसीएल (Punjab State Power Corporation Limited) का का दावा है कि राज्य में पावर कट नहीं हो रहा है. मगर सच्चाई कुछ और ही है.

 

चंडीगढ़: पंजाब में थर्मल प्लांट्स में कोयले कमी (Shortage of Coal in Thermal Plants in Punjab) के कारण पूरे राज्य में बिजली संकट के बादल मंडराने लगे हैं. दरअसल, पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को पिछले साल की तुलना में बिजली की मांग में 40 प्रतिशत की वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है. 85 प्रतिशत से अधिक के प्लांट लोड फैक्टर पर काम करते हुए सभी 5 थर्मल प्लांट्स की दैनिक कोयले की आवश्यकता लगभग 75 मीट्रिक टन है. कम क्षमता पर चलने के बावजूद पंजाब में ताप संयंत्रों को दैनिक कोयले की आवश्यकता का आधा भी नहीं मिल पा रहा है. इसलिए सभी थर्मल प्लांट्स में बिजली का उत्पादन घट गया है. किसानों और ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें हर दिन 30 मिनट से लेकर एक-दो घंटे तक की कटौती का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि पीएसपीसीएल ने कोई कटौती करने से इनकार किया.

इसके अलावा पीएसपीसीएल को जून से शुरू होने वाले धान की बुवाई के मौसम के दौरान खेतों को 8 घंटे की आपूर्ति का वादा पूरा करने के लिए कटौती का सहारा लेने के लिए बिजली नियामक से मंजूरी मिल गई है. बिजली मंत्री हरभजन सिंह (Harbhajan Singh, Power Minister) ने कहा कि धान सीजन में बिजली की मांग 15,000 मेगावाट से अधिक हो सकती है. उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल से 9 अप्रैल तक लगभग 16,085 लाख यूनिट (एलयू) उपलब्ध कराए गए थे. यह पिछले साल की इसी अवधि के दौरान उपलब्ध कराई गई बिजली की तुलना में 43 प्रतिशत अधिक था.

मार्च के बाद से तापमान में भारी वृद्धि के कारण बिजली की मांग में उछाल आया है. पीएसपीसीएल ने 2021 में खरीदे गए 186 एलयू की तुलना में इस साल पावर एक्सचेंज से 655 एलयू खरीदे हैं. बिजली मंत्री ने कहा कि पीएसपीसीएल अन्य राज्यों के साथ बिजली के अधिकतम आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. नवंबर 2021 से ‘बैंकिंग’ के लिए बिजली की आपूर्ति की गई है ताकि आगामी धान के मौसम के दौरान 2,300 मेगावाट बिजली प्राप्त की जा सके.

उन्होंने कहा कि झारखंड में पीएसपीसीएल की पछवाड़ा कोयला खदान 2015 से चालू नहीं है. निगम अब इसे जल्द से जल्द फिर से शुरू करना चाहता है. हरभजन सिंह ने कहा कि खदान में पानी निकालने का काम पिछले सप्ताह से किया जा रहा है और जून के अंत तक खनन शुरू हो जाएगा. यह धान के मौसम के लिए पर्याप्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा.

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