सड़कों से क्यों गायब हो गए बख्तरबंद पोकलेन और JCB? जानें पूरी खबर..
मीडिया ने ग्राउंड जीरो पर थोड़ी पड़ताल की तो पाया कि शंभू बार्डर पर हरियाणा पुलिस से मुकाबले करने के लिए जो बंदोबस्त किसानों ने किए थे फिलहाल उनको हटा लिया गया है. शंभू बार्डर पर बुधवार को हरियाणा पुलिस से टकराव के बीच बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने या बार्डर पर ही डटे रहने को लेकर भी मतभेद दिखा था.
किसान आंदोलन
किसानों का दिल्ली कूच जारी है. वह बॉर्डर पर डटे हुए हैं. दूसरी तरफ पुलिस ने भी ठान रखी है कि उनको आगे जाने नहीं देंगे. इसके लिए सड़कों पर कड़ा पहरा है. पहरा तो छोड़िए किला बंदी कहना ज्यादा मुनासिब होगा. पूरे रास्ते पर बैरिकेडिंग है जिसकी तस्वीरें बीते कई दिनों से आप देख ही रहे हैं. लेकिन अब शंभू बार्डर की तस्वीर बदल गई है.
दिल्ली कूच पर आमादा पिछले 10 दिनों से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बार्डर पर बैठे किसानों और हरियाणा पुलिस प्रशासन के बीच बुधवार को जमकर झड़प हुई. जहां एक तरफ किसान किसी भी सूरत में हरियाणा की नाकेबंदी और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखे तो हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने प्रदर्शनकारियों को पीछे खदेड़ने के लिए ड्रोन की मदद से सैकड़ों आंसू गैस के गोले बरसाये. लेकिन महज 12 घंटों के अंदर ही तस्वीर बदल चुकी है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या बुधवार को लाख जतन के बावजूद आगे बढ़ने में नाकाम रहे किसानों का मनोबल अब टूटने लगा है.
सड़कों से गायब है बख्तरबंद पोकलेन और JCB
ये सवाल इसलिए और लाजिमी हो जाते हैं क्योंकि केंद्र सरकार के बातचीत के बुलावे पर अभी तक किसान फैसला नहीं कर पाए हैं. बुधवार को ही किसानों ने 2 दिनों के आगे ना बढ़ने और संघर्ष विराम का एलान कर दिया था. जिन मॉडिफाई ट्रेक्टरों और मशीनों को फ्रंट पर तैनात कर किसान अपना शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे गुरुवार को वो नदारद दिखे. जबकि हरियाणा की तरफ तैनाती जस की तस है. जिन बख्तरबंद पोकलेन और JCB मशीनों के बूते किसान बैरिकेडिंग तोड दिल्ली कूच की हूंकार भर रहे थे, उन मशीनों को फ्रंट लाइन से हटाकर वापस ट्रालियों पर लाद दिया गया है. JCB मशीनों और मॉडिफाइड ट्रेक्टरों को अंडरग्राउंड कर दिया गया है.
मीडिया ने ग्राउंड जीरो पर थोड़ी पड़ताल की तो पाया कि शंभू बार्डर पर हरियाणा पुलिस से मुकाबले करने के लिए जो बंदोबस्त किसानों ने किए थे फिलहाल उनको हटा लिया गया है. रात में ही जुगाड़ तकनीक से लैस ट्रेक्टरों, पोकलेन और JCB मशीनों को फ्रंट लाइन से हटा लिया गया था. ढूंढने पर एक पॉकलेन मशीन जाने के लिए तैयार ट्रॉली पर लदी हुई मिली. बाकियों को या तो हटा दिया गया है या फिर अंडरग्राउंड कर दिया गया है. शंभू बार्डर पर पंजाब पुलिस की मौजूदगी भी पिछले दिनों से ज्यादा बढ़ी नजर आई. इतना ही नहीं शंभू बार्डर पर हर रोज मीडिया के सामने अपनी बात रखने वाले किसान नेता भी आज बार्डर पर कैमरे के सामने नहीं आए. सेकेंड लीडरशिप को आगे रखा गया. हालांकि जगजीत सिंह डल्लेवाल आंसू गैस के गोले लगने के बाद बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं. सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि वो घायल किसानों की तीमारदारी में व्यस्त हैं.








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