किसान आंदोलन : केन्द्र सरकार ने दिया है प्रस्ताव
केन्द्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य एवं उद्योगमंत्री पीयूष गोयल और केन्द्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय और किसान संगठनों के बीच हुई चौथे दौर की वार्ता की समाप्ति के बाद जो प्रस्ताव केन्द्र सरकार द्वारा किसान संगठनों को दिया गया है उससे समझौते की आशा बनी है।
पत्रकारों से बात करते हुए केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि किसानों से सकारात्मक चर्चा हुई। हमने दलहन समेत कुछ फसलों पर पांच वर्ष की गारंटी का प्रस्ताव दिया है। किसान नेताओं ने पंजाब में गिरते जलस्तर का मुद्दा उठाया। इस पर हमने प्रस्ताव दिया कि अगर अरहर, उड़द जैसे अनाज को एमएसपी में लाया जाता है तो आयात में कमी आएगी व जल स्तर की भी रिकवरी होगी। किसानों ने मक्का और कपास को भी एमएसपी पर खरीदने की मांग की। हमने कहा कि एनसीसीएफ व नैफेड फसलों को एमएसपी पर खरीदेंगी। यह अनुबंध पांच वर्ष चलेगा। एक पोर्टल बनेगा। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
काटन कारपोरेशन आफ इंडिया भी किसानों से पांच साल का एग्रीमेंट करेगी जो कपास एमएसपी पर खरीदेगी। उन्होंने किसानों से प्रदर्शन खत्म कर घर लौटने की अपील की। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री होने के चलते पंजाब के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल हुआ। तीन फसलों पर पांच साल तक एमएसपी की लिखित गारंटी देने का प्रस्ताव दिया है। अब निर्णय किसानों को लेना है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि सकारात्मक वार्ता हुई, लेकिन निष्कर्ष अभी बाकी है। केन्द्र ने जो प्रस्ताव दिया है, उस पर हम अपने संगठनों से बात करेंगे। कृषि विशेषज्ञों से भी राय लेंगे। फिर किसान संगठनों से चर्चा करेंगे कि यह किसान हित में है या नहीं। सरकार ने जो प्रस्ताव दिया है, उस पर हम विचार करेंगे। यदि कोई सहमति नहीं बनी तो 21 फरवरी को 11 बजे हम शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली के लिए आगे बढ़ेंगे। सरकार की तरफ से सकारात्मक संकेत दिए गए है। सरकार के अनुसार सरकारी बैंकों का कृषि ऋण माफ हो सकता है, निजी ऋण चुकाना होगा। पिछले आंदोलन में किसानों पर दर्ज 3500 केस वापस हो सकते हैं।
किसान संगठनों की तरफ से सरकार द्वारा दिए प्रस्ताव पर विचार करने की बात एक सकारात्मक संकेत ही है। सरकार द्वारा दिया प्रस्ताव व्यवहारिक है क्योंकि इससे किसानों को गेहूं और चावल की फसल चक्र से बाहर निकलने का अवसर मिलेगा और आर्थिक सुरक्षा भी बनी रहेगी। प्रस्ताव पंजाब के हित में भी है क्योंकि जब गेहूं और चावल को छोड़ अन्य फसलों की एमएसपी पर खरीद शुरू होगी तो गिरते हुए भू- जलस्तर पर नकेल और भूमि की क्षीण होती उपजाऊ शक्ति भी थम जाएगी।
सरकार ने किसानों की मुश्किलों को समझते हुए जो प्रस्ताव दिया है उस को किसानों को स्वीकार करते हुए जिन अन्य कठिनाइयों का सामना वह कर रहे हैं उनको लेकर सरकार के साथ अपनी बातचीत जारी रखनी चाहिए। किसानों को यह भी समझना चाहिए कि रास्ता रोकने के कारण पंजाब की अर्थ व्यवस्था पर तत्काल रूप से बुरा प्रभाव तो पड़ ही रहा है अगर धरना जारी रहा तो वर्तमान के साथ-साथ पंजाब का भविष्य भी धूमिल हो जाएगा। क्योंकि धरने और प्रदर्शनों के कारण पंजाब व पंजाबियों की छवि भी बिगड़ रही है।
पंजाब उद्योग के क्षेत्र में पिछड़ता जा रहा है। धरने और रास्ता रोकने के कारण निवेशक पंजाब में निवेश करने से घबराएगा जिस कारण प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ेगी। इस स्थिति से बचने का एक ही हल है कि प्रस्ताव स्वीकार कर बातचीत जारी रहे। मुख्यमंत्री मान ने बैठक में पंजाब के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया है। उनकी प्राथमिकता पंजाब के हित को सम्मुख रख कर किसानों को टकराव की जगह संवाद की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना ही होनी चाहिए। यह भी पंजाब व पंजाबियों की सेवा ही होगी।









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